जेम एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक बजट

-सोने का आयात शुल्क १२.५% से घटकर ७.५% हुआ
-चांदी आयात शुल्क १२.५% से घटकर ७.५% हुआ
-प्लेटिनम पर ड्यूटी घटाकर १०% किय
-कट एंड पॉलिश्ड क्युबिक जिरकोनिया एंड सिथेटिक स्टोन्स के आयात पर शुल्क मौजूदा ७.५ प्रतिशत से बढ़ाकर १५ प्रतिशत किया गया।
-इंडस्ट्री ने अंतर्राष्ट्रीय हीरा नीलामी से बी २ बी खरीद पर २% के इक्वालाइजेशन लेवी पर स्पष्टीकरण मांगा
-एक नए सेबी विनियमित गोल्ड एक्सचेंज की घोषणा की गई

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दूरदर्शी बजट का जीजेईपीसी ने स्वागत करते हुए इसे आभूषण निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सोने, चांदी और प्लैटिनम जैसे कच्चे माल पर सीमा शुल्क में कमी किये जाने वाला एतिहासिक बजट बताया। वित्तमंत्री ने सोने, चांदी और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में कटौती कर जेम एंड ज्वैलरी निर्यात को बढ़ावा देने के अनेक उपायों की आज अपने बजट में घोषणा की। सुश्री निर्मला सीतारमण ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क १२.५% से घटाकर ७.५%, प्लेटिनम, पैलिडम आदि पर आयात शुल्क १२.५% से घटाकर १०%, सिल्वर डोर बार पर आयात शुल्क ११% से ६.१%, गोल्ड / सिल्वर फाइंडिंग पर आयात शुल्क २०% से घटाकर १०%, स्पेंट कैटेलिस्ट या एश वाले प्रेसियस मेटल्स पर आयात शुल्क ११.८५% से घटाकर ९.२% और कीमती धातु के सिक्के के आयात शुल्क को १२.५% से घटाकर १०% करने का एलान किया। इसके अलावा वित्तमंत्री ने जहां सोने चांदी के आयात शुल्क को कम किया बल्कि उनके ऊपर २.५ फीसदी का एग्री इंफ्रा सेस भी लगा दिया। एग्री इंफ्रा डेवलपमेंट सेस लगाने के बाद इंपोर्ट ड्यूटी १०.२३ फीसदी के आस-पास रह सकती है। जानकारी के मुताबिक सरकार की ओर से लगाया गया एग्री सेस इंपोर्ट ड्यूटी के ऊपर लगेगा। गौरतलब है कि सोने-चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती से इसका फायदा आम ग्राहकों को मिलने की संभावना है।

केंद्रीय वित्तमंत्री के इन बजटीय घोषणाओं का जेम एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री के दिग्गजों ने जोरदार स्वागत किया है। जीजेईपीसी के चेयरमैन कॉलिन शान ने कहा कि हम इस साहसिक और व्यावहारिक विकासोन्मुख बजट के लिए प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क को १२.५ प्रतिशत से घटाकर ७.५ प्रतिशत करने से जेम एंड ज्वैलरी निर्यात विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। कच्चे माल पर शुल्क में कमी से इस क्षेत्र को बहुत अधिक आवश्यकता होगी और इसे अगले स्तर तक ले जाने में मदद मिलेगी। वास्तव में, कीमती धातु पर उच्च शुल्क ने हमारे निर्यात को बड़े भारतीय प्रवासियों / एनआरआई के लिए अप्रभावी बना दिया था, जो आभूषण खरीदने के लिए दुबई, हांगकांग या अन्य केंद्रों में जा रहे थे और भारत में व्यवसाय के साथ-साथ रोजगार को भी प्रभावित कर रहे थे। आभूषण के आयात शुल्क में १०% की कमी से आभूषण निर्माता निर्यातकों को बड़े पैमाने पर मदद मिलेगी।

श्री शाह ने आगे कहा कि इंडस्ट्री के लिए एक और राहत समकारीकरण लेवी पर स्पष्टीकरण था। हम जो समझते हैं कि बजट से यह है कि २% का ऑनलाइन समानकरण लेवी अब अंतर्राष्ट्रीय डायमंड नीलामी से बी २ बी खरीद पर लागू नहीं है। यह हीरे के हमारे निर्माताओं को खनिकों से सीधे खरीदने में मदद करेगा।

श्री शाह ने कहा कि वित्तमंत्री ने अपने बजट में सेबी विनियमित नए गोल्ड एक्सचेंज की स्थापना की भी घोषणा की है। इसके तहत, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को सोने के आदान-प्रदान के लिए पूंजी बाजार प्रहरी के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। कोलिन ने कहा कि हम इस कदम का स्वागत करते हैं क्योंकि इससे निश्चित रूप से सोने के विपणन और बिक्री में आसानी होगी।

जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष विपुल शाह ने इसे एक और दूरदर्शी बजट बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने इन कठिन समय में साहसिक बजट पेश करके एक उल्लेखनीय काम किया है। बजट बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निवेश, नियमों के कंसोलिडेशन, कई क्षेत्रों में डिजिटलीकरण को लागू करने और विनियामक प्रतिबंध को कम करने पर प्रस्तावों को केंद्रित किया है। उपभोग में भी सुधार के विभिन्न उपाय किये गये हैं। हम इस लैंडमार्क बजट के लिए वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को बधाई देना चाहते हैं।

जीजेसी के चेयरमैन आशिष पेठे ने सरकार की इस पहल को इंडस्ट्री के हित में बताया। उन्होंने कहा कि इससे ज्वैलर्स और ग्राहकों को काफी फायदा होगा। जीजेसी इसके लिए सरकार से लंबे अरसे से पहल कर रहा था और हमें खुशी है कि सरकार ने हमारी इस मांग को माना है और आयात शुल्क में कटौती की है। सेबी की निगरानी में गोल्ड एक्सचेंज शुरु करने का प्रस्ताव सराहनीय है। उन्होंने कहा कि हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे जीएमएस को और आसान और सरल बनाए जिससे कि घरों में पड़े बड़े पैमाने पर सोने का भंडार बाजार में आए और देश के हित में उसका इस्तेमाल हो। इससे हम आयात से बच सकेंगे।

जीजेसी के वाइस प्रेसीडेंट श्याम मेहरा ने कहा कि यह एक एतिहासिक बजट है और आयात शुल्क में कमी को लेकर बहुप्रतीक्षित बजट है। उन्होंने कहा कि जीजेसी अब सरकार से जीएसटी और कम करने एवं ज्वैलरी पर ईएमआई आदि को कम करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार हमारी इन मांगों को इंडस्ट्री के हित में पूरा करेगा।

इंडिया ज्वैलरी फोरम (आईजेएफ) के चेयरमैन राकेश कुमार ने कहा कि वित्तमंत्री ने स्पाट गोल्ड एक्सचेंज का प्रस्ताव किया है। इसे सेबी और आरबीआई द्वारा विनियमित और नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क में मात्र २ प्रतिशत की कटौती से इंडस्ट्री को अधिक लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज सोने की सबसे ज्यादा जरूरत उत्पादक उद्देश्यों के लिए सोने को जुटाने की है। भारत में सोने की संचित संपत्ति २०००० टन से अधिक है। सरकार को राष्ट्र के विकास के लिए इन बचत का उपयोग उत्पादक उपयोगों के लिए समान रूप से करना चाहिए।

एमराल्ड ज्वैल इंडस्ट्री लिमिटेड के चेयरमैन श्रीनिवासन ने कहा कि यह इंडस्ट्री के लिए उत्कृष्ट बजट है। जेम एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए आयात शुल्क में कटौती एक सराहनीय कदम है। इससे तस्करी में कमी आएगी। इंडस्ट्री के यह उल्लेखनीय बजट है। मैं वित्तमंत्री को इसके लिए १०० में से १०० दूंगा।

ज्वैलरी एसोसिएशन, उत्तराखंड के चेयरमैन बिपिन बेरी ने कहा कि केंद्रीय वित्तमंत्री के बजटीय प्रस्तावों से इंडस्ट्री को बल मिलेगा और कठिन दौर से गुजर रहे कारोबारियों को राहत मिलेगी। अब हमारा देश दुनिया के बाजारों को चुनौती दे सकेगा। मौजूदा बजट देश के इंटरनेशनल ट्रेड को बढ़ाने में पहला कदम है।