जीजेईपीसी ने IIGJ उडुपी में आभूषण कारीगरों के लिए पीएम विश्वकर्मा प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत
  • प्रतिभागियों को ₹500 का दैनिक स्टाइपेन्ड (वजीफा) और ₹15,000 का टूलकिट मिलेगा
  • IIGJ उडुपी 500 से अधिक पीएम विश्वकर्मा कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया
  • 13,000 करोड़ रुपये की पीएम विश्वकर्मा योजना से पारंपरिक कारीगरों के लगभग 30 लाख परिवारों को लाभ प्राप्त होगा

जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) ने कारीगरों को सशक्त बनाने के प्रयास में भारतीय रत्न और आभूषण संस्थान (आईआईजीजे), रत्न और आभूषण उद्योग और उनके कौशल और उत्पादकता को बढ़ाने के उद्देश्य से उडुपी (मैंगलोर, कर्नाटक) में पीएम विश्वकर्मा प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत।

कार्यक्रम के प्रतिभागियों को भारत सरकार से ₹15,000 मूल्य का एक टूलकिट मिलेगा, साथ ही सात दिवसीय प्रशिक्षण अवधि के लिए ₹500 का दैनिक वजीफा भी मिलेगा।

आईआईजीजे उडुपी में पहले बैच के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता उडुपी जिले की उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. के. विद्या कुमारी, आईएएस, ने की। इस कार्यक्रम में जिला उद्योग केंद्र के संयुक्त निदेशक श्री नागराज नायक; श्री प्रदीप डिसूजा, जिला कौशल विकास अधिकारी; जीजेईपीसी के सीओओ श्री सिद्धार्थ एच.; और आईआईजीजे के सीईओ श्री देबाशीष विश्वास भी उपस्थित रहे।

जीजेईपीसी के अध्यक्ष श्री विपुल शाह ने कहा, "कारीगर और शिल्पकार 'मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड' रत्न और आभूषण उद्योग की रीड़ की हड्डी हैं। पीएम विश्वकर्मा कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे विश्वकर्मा के पारंपरिक कौशल को सशक्त बनाना और बढ़ाना है।" यह उन्हें कौशल बढ़ाने और आधुनिक उपकरणों तक पहुंच के अवसर प्रदान करता है। IIGJ उडुपी आगामी बैचों में 500 से अधिक पीएम विश्वकर्मा ट्रेनिश को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार है, जिसमें प्रत्येक बैच में 30-40 उम्मीदवार होंगे।

13000 करोड़ की इस योजना के तहत पांच वर्षों की अवधि के लिए बुनकरों, सुनारों, लोहारों, कपड़े धोने वाले श्रमिकों और नाई सहित पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लगभग 30 लाख परिवारों को लाभ होगा। सितंबर 2023 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विश्वकर्मा जयंती' के अवसर पर 'पीएम विश्वकर्मा' योजना शुरू की, जिसके तहत पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को संपार्श्विक की आवश्यकता के बिना न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण सहायता प्रदान की जाएगी।

यह योजना संपार्श्विक-मुक्त ऋण, ब्याज छूट और डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन के माध्यम से वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, यह क्षेत्र में वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने, ब्रांड प्रचार और बाजार लिंकेज के लिए एक मंच प्रदान करना चाहता है।

कारीगरों और शिल्पकारों को लाभ

यह योजना कारीगरों और शिल्पकारों को निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगी:-

आईडी कार्ड: पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड के माध्यम से कारीगरों और शिल्पकारों की पहचान।

कौशल उन्नयन: 5-7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण और 15 दिनों या उससे अधिक का उन्नत प्रशिक्षण, प्रति दिन 500 रुपये के वजीफे के साथ।

टूलकिट प्रोत्साहन: 15000 रूपए की टूलकिट , बेसिक स्किल ट्रेनिंग की शुरुआत में ई-वाउचर के रूप में।

ऋण सहायता: 3 लाख रूपए तक की संपार्श्विक मुक्त 'उद्यम विकास ऋण' दो किश्तों पहले 1 लाख और फिर रु 2 लाख क्रमश: 18 महीने और 30 महीने की अवधि के लिए 2 लाख रुपये, 5% निर्धारित रियायती ब्याज दर पर, भारत सरकार द्वारा 8% की सीमा तक छूट के साथ प्राप्त कर सकते हैं। जिन लाभार्थियों ने बुनियादी प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, वे 1 लाख रुपये तक की क्रेडिट सहायता की पहली किश्त का लाभ उठाने के पात्र होंगे। दूसरी ऋण किश्त उन लाभार्थियों के लिए उपलब्ध होगी जिन्होंने पहली किश्त का लाभ उठाया है और एक मानक ऋण खाता बनाए रखा है और अपने व्यवसाय में डिजिटल लेनदेन को अपनाया है या उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन: प्रति डिजिटल लेनदेन 1 एक रुपये की राशि, अधिकतम 100 लेनदेन मासिक तक प्रत्येक डिजिटल भुगतान या रसीद के लिए लाभार्थी के खाते में जमा किया जाएगा।

मार्केटिंग सपोर्ट: कारीगरों और शिल्पकारों को गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग, जीईएम जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर ऑनबोर्डिंग, विज्ञापन, प्रचार और मूल्य श्रृंखला से जुड़ाव में सुधार के लिए अन्य मार्किटिंग गतिविधियों के रूप में विपणन सहायता प्रदान की जाएगी।

उपर्युक्त लाभों के अलावा, यह योजना लाभार्थियों को औपचारिक एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र में 'उद्यमियों' के रूप में उदयम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर शामिल करेगी। लाभार्थियों का नामांकन पीएम विश्वकर्मा पोर्टल पर आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से किया जाएगा। लाभार्थियों के नामांकन के बाद तीन-चरणीय सत्यापन किया जाएगा जिसमें ग्राम पंचायत/यूएलबी स्तर पर सत्यापन, जिला कार्यान्वयन समिति द्वारा जांच और सिफारिश और स्क्रीनिंग समिति द्वारा अनुमोदन शामिल होगा।